भारतीय सेना में 25 वर्षों तक समर्पित सेवा देने के बाद, जब वीर सैनिक प्रदीप साहू जी सेवानिवृत्त होकर अपने गृह नगर लौटे, तो दुर्ग रेलवे स्टेशन पर लोगों ने उनका जोशीला स्वागत किया। तिरंगे झंडों और देशभक्ति के नारों के साथ स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और युवाओं ने उन्हें सम्मानित किया।
सेना में रहते हुए प्रदीप साहू जी ने देश की सीमाओं पर कठिनतम परिस्थितियों में अपनी सेवाएं दीं — चाहे वह बर्फीला सियाचिन ग्लेशियर हो, हिमालय की ऊँचाइयाँ, राजस्थान के तपते रेगिस्तान, या असम और जम्मू-कश्मीर की संवेदनशील सीमाएं। मात्र 16 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए प्रदीप जी ने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की सुरक्षा में लगा दिया।
उनके साथ उनकी पत्नी श्रीमती शीतल साहू को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। एक सैनिक की पत्नी के रूप में उन्होंने दशकों तक अकेलेपन, चिंता और जिम्मेदारियों का डटकर सामना किया। कई बार त्योहारों पर पति के बिना समय बिताना, बच्चों की शिक्षा और परिवार की जिम्मेदारी उठाना — यह सब उन्होंने पूरे साहस और संकल्प के साथ निभाया।
